Tuesday, 25 February 2014

mool nakshtra मूल नक्षत्र

मूल नक्षत्र

अश्विनी, आशलेषा,मघा,ज्येष्ठा,मूल तथा रेवती नक्षत्र गॅंडमूल कहलाते हैं. गॅंड मूल मे उत्पन्न बालक अथवा बालिका की २७वे दिन उसी नक्षत्र मे विधि पूर्वक शांति करवाना कल्याणकारी होता है. शांति ना कराने पर बालक माता पिता,कुल तथा स्वयं के लिए घातक हो जाता है. नारद संहिता के अनुसार - ज्येष्ठा नक्षत्र की अन्तिम तथा मूल नक्षत्र की प्रारंभिक चार घड़ियाँ अभूक्त मूल है.
आचार्य वशिष्ठ के मतानुसार-ज्येष्ठा की अंतिम एक घटी . मूल की प्रथम . घटी अभूक्त मूल हैं.
. बृहस्पति के अनुसार- दोनो नक्षत्रों की संधि की ......................................

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sapne

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