Wednesday, 17 September 2014

moolank ek ' 1 ' ka bhavishya fal

                                                         मूलांक एक का भविष्य फल

जिन लोगो का जन्म 1 , 10 ,19 या 28 तारीख को होता है उनका मूलांक एक होता है.मूलांक एक वृहद अंक की श्रेणी मे आता है इसका स्वामी सूर्य होता है .मूलांक एक का प्रतिनिधि ग्रह सूर्य होने के कारण ऐसे व्यक्ति प्रबल महत्वाकांक्षी,स्वाभिमानी ,एवम् मजबूत इक्षा शक्ति वाले होते है .
मूलांक एक की चारित्रिक विशेषताएँ
आप लोगो की  सहन शक्ति उत्तम कोटि की होती है जीवन मे आपको भयंकर उथल-पुथल देखनी पड़ती है . नेतृत्व करने की .....................................................................................................                                  for more detail please click this link   http://trinetraastro.com/ 
for more detail please click this link   http://jyotishsabkeliye.in/

Friday, 12 September 2014

Feng shui dwara apartment flat ka chayan

                                                फेंग शुई द्वारा अपार्टमेंट फ्लैट का चयन 


जब आप रहने के लिए किसी अपार्टमेंट  का चुनाव करे तो सबसे पहले यह देखे की अपार्टमेंट किस स्थान पर बना हुआ है .  हमारे भारतीय वास्तु से फेंगशुई  वास्तु मे काफ़ी अंतर है .

आप देखे की अपार्टमेंट भू खंड पर अकेला है या उसके आस –पास अन्य अपार्टमेंट भी हैं,क्या उनकी उचाई समान हैं या कम या अधिक . अधिक ऊँचे अपार्टमेंट आपके द्वारा चुने गये अपार्टमेंट के लिए अशुभ होते हैं .

जो अपार्टमेंट किसी जगह पर अकेला खड़ा होता है वह भी शुभ नही होता ,क्योकि उसके पास से चलती वायु अपार्टमेंट मे प्रवेश करने वाली शुभ उर्जा ची को अपने साथ उड़ा कर ले जाती है.

अँग्रेज़ी का अक्षर एल,पी,जी  आकर के अपार्टमेंट फेंगशुई की  के अनुसार ......................................................

 for more detail please click this link http://trinetraastro.com/
for more detail please click this link  http://jyotishsabkeliye.in/

Thursday, 11 September 2014

Pati - Patni sambandh


                                                               पति – पत्नी संबंध

विवाह से 4 दिन पूर्व  साबुत हल्दी की 7 गाँठ ,पीतल के 3 सिक्के ,तोड़ा सा केसर ,गुड और चने दाल को पीले कपड़े मे बाँध कर कन्या अपने ससुराल की दिशा मे उछाल दे .इस टोटके द्वारा कन्या को अपने पति और ससुराल का हमेशा प्यार मिलेगा.

पति से मन मोटॉव दूर करने के लिए 7 गोमती चक्र ,7 लघु नारियल, 7मोती शंख और पीला वस्त्र लाए .फिर सभी सामग्री को पति के उपर से उतार कर जलती हुई होलिका मे फेक दे ,फिर पीछे देखे बिना घर आ जाए .

यदि कभी किसी स्त्री को दान करने की इच्छा हो तो दान सामग्री मे लाल सिंदूर के साथ इत्र की शीशी , चने की दाल तथा केसर अवश्य रखें . इस प्रयोग से सुहाग की आयु मे वृद्धि होगी.

विवाहित स्त्री को अपने परिवार की कुशलता के लिए नित्य दुर्गा चालीसा के पाठ के साथ उनके 108 नाम का नित्य जाप करना चाहिए.

यदि किसी कारण वश किसी सुहागिन का ससुर उससे नाराज़ रहता हो तो वह स्त्री प्रतिदिन जल मे ................ for more detail please click this link http://trinetraastro.com/
for more detail please click this link http://jyotishsabkeliye.in/

Wednesday, 3 September 2014

Motape ka jyotishiya karan

you will read soon
for more detail please click this link http://trinetraastro.com/

Santaan sambandhit samasya ka jyotishya karan

         
                                       मातृत्व सुख, समस्याएँ और  निदान
स्त्री  जीवन की सार्थकता मातृत्व मे ही देखी गयी है.विवाह संस्था का मुख्य प्रायोजन भी यही है की स्त्री,पुरुष संतान को जन्म देकर सृष्टि की रचना मे अपना योगदान कर ,पूर्वजों ऋण से मुक्त  हो जाए.
जातक परिजातके अनुसार ,संतान उत्पत्ति स्त्री के जीवन को सार्थक बनाकर उसका भग्योदय करती है. अतः नवम भाव को भी संतान भाव के रूप मे माना जाना चाहिए .नवमेश की कुंडली मे स्थिति व अन्य ग्रहों के साथ उसके संबंधों पर भी विचार किया जाना चाहिए.
ऋषिपराशर के अनुसार लग्न और चंद्र लग्न से नवम भावों मे से जो बलशाली हो ,वही भाव  संतानोत्पत्ति के लिए कारक भाव माना जाना चाहिए .दूसरी ओर जैमिनी ऋषिने स्त्री के कुंडली मे संतान के संकेत के लिए सप्तम भाव के अध्ययन की भी आवश्यकता बताई है.

व्यस्क और स्वस्थ स्त्री मे उसके रजस्वला होने से लेकर रजोनिव्रित्ति  तक का काल एक कामचक्र 

द्वारा चक्र का एक चरण अंड निर्माण व प्रवाह का और दूसरा चक्र मासिक धर्म का एक होता है,जो 

बारी-बारी से चलते रहते है.ज्योतिर्विदो के अनुसार यह कामचक्र मंगल व चंद्र के बीच                                                                                                                                                                                                            for more detail please click this link http://trinetraastro.com/
  
for more detail please click this link  http://jyotishsabkeliye.in/

maa na ban paane ka jyotishiya karan

                                                        मातृत्व सुख, समस्याएँ और  निदान
स्त्री  जीवन की सार्थकता मातृत्व मे ही देखी गयी है.विवाह संस्था का मुख्य प्रायोजन भी यही है की स्त्री,पुरुष संतान को जन्म देकर सृष्टि की रचना मे अपना योगदान कर ,पूर्वजों ऋण से मुक्त  हो जाए.
जातक परिजातके अनुसार ,संतान उत्पत्ति स्त्री के जीवन को सार्थक बनाकर उसका भग्योदय करती है. अतः नवम भाव को भी संतान भाव के रूप मे माना जाना चाहिए .नवमेश की कुंडली मे स्थिति व अन्य ग्रहों के साथ उसके संबंधों पर भी विचार किया जाना चाहिए.
ऋषिपराशर के अनुसार लग्न और चंद्र लग्न से नवम भावों मे से जो बलशाली हो ,वही भाव  संतानोत्पत्ति के लिए कारक भाव माना जाना चाहिए .दूसरी ओर जैमिनी ऋषिने स्त्री के कुंडली मे संतान के संकेत के लिए सप्तम भाव के अध्ययन की भी आवश्यकता बताई है.
व्यस्क और स्वस्थ स्त्री मे उसके रजस्वला होने से लेकर रजोनिव्रित्ति  तक का काल एक कामचक्र द्वारा चक्र का एक चरण अंड निर्माण व प्रवाह का और दूसरा चक्र मासिक धर्म का एक होता है,जो बारी-बारी से चलते रहते है.ज्योतिर्विदो के अनुसार यह कामचक्र मंगल व चंद्र के बीच चलने वाली पारस्परिक प्रक्रिया होती है.पुरानी कोशिकाओं को तोड़कर मासिक धर्म स्राव कारण  मंगल का नयी कोशिकाओं का निर्माण और आंड निर्माण व प्रवाह चंद्र का दायित्व होता है. इस प्रकार यह काम-चक्र मंगल व चंद्र की पारस्परिक प्रक्रिया का ही प्रतिफल होता है.चंद्रमा बारहो राशियों मे अपने भ्रमण का एक चक्र दो चरणो मे 27.32 दिन मे करता है. इसी के अनुसार स्त्री के उत्पत्ति अंगों मे काम-चक्र भी इसी के अनुसार चलते                                                                                                                                                                                                                                          for more detail please click this link  http://trinetraastro.com/
for more detail please click this link   http://jyotishsabkeliye.in/

Sunday, 24 August 2014

Namardi , thandapan ka jyotishiya karan

                                  नामर्दी ,ठंडापन व कामाँगो के अन्य विकार का ज्योतिषीय कारण

1 –सूर्य व चंद्र एक-दूसरे से ठीक सातवे स्थान मे हो और उन की एक-दूसरे पर पारस्परिक दृष्टि पड़ती हो तो जातक या तो शारीरिक रूप से ही क्लीव [हिंजडा] होगा अथवा कम-क्रिया मे असमर्थ ,नपुंसक होगा.
2 –मंगल व शनि एक- दूसरे से सातवे हो तो जातक नपुंसक होगा.
3 –सूर्य सम राशि मे हो और उसके सातवें स्थान पर मंगल स्थित होकर वे दोनो एक  -दूसरे को सीधे देखते हो,तो भी जातक क्लीव होगा.
4 –चंद्र और लग्न विषम राशि मे हो और उन लोगो पर मंगल एक साथ दृष्टि डालता हो,तो ऐसा जातक नपुंसक होगा.
5 – बुध अकेला आठवें भाव   ............................................                                                                                                      
for more detail please click this link http://trinetraastro.com/  

 for more detail please click this link    http://jyotishsabkeliye.in/rashi-sex-life
                 

Kundali me sautan ka yog

                                                             कुंडली मे सौतन का योग

चतुर्थ भाव स्त्री कुंडली मे सौतन विषयक संकेत भी देता है ,इस भाव पर अशुभ [क्रूर]ग्रहो विशेषकर सूर्य ,राहु या शनि का किसी भी प्रकार की स्थिति, राशि-स्थिति ,संगति या दृष्टि संबंधी दुष्प्रभाव उस स्त्री के जीवन मे सौतन की समस्या के संकेतक माने जा सकते हैं.
चतुर्थ भाव के समान ही बारहवां भाव भी जातक के सुखों का प्रतिनिधित्व करता है ,यह विशेषकर सेज-सुख ,यौन-क्रीड़ा आदि के विषय मे स्पष्ट संकेत देता है.
बारहवा भाव,कुंडली के सप्तम भाव से छ्ट्वा होता है ,और इस प्रकार वह जातक [स्त्री और पुरुष]के वैवाहिक जीवन के प्रतिद्वंदियो या शत्रुओं का संकेतक होता है,स्त्री के जीवन मे सौतन की समस्या लाने वाले कुछ महत्वपूर्ण ज्योतिषीय दुर्योग निम्न प्रकार है….
1 – यदि लग्न ,चंद्र लग्न और मंगल लग्न से पड़ने वाले सातवे घर अशुभ ग्रहो की उनमे उपस्थिति या उन पर दृष्टि द्वारा दुष्प्रभावित हो और विशेषकर राहु उनमे से किसी                                                                         

for more detail please click this link  http://trinetraastro.com/

 for more detail please click this link  http://jyotishsabkeliye.in/vivah-sukh

Saturday, 23 August 2014

naree aur vastu

                                                                        नारी और वास्तु 

वास्तु शास्त्र मे मकान मे नारी या गृहणी का अहम स्थान है ,बिना नारी के मकान की उपयोगिता नही ,और बगैर वास्तु के मकान शमशान या मरघट मे तब्दील हो जाता है ,इस लेख मे वास्तु और नारी के बीच संबंधो वा संतुलन से पैदा होने वाली उपयोगी उर्जा पर ज़ोर दिया गया है ,अगर घर की स्त्रियाँ वास्तु सम्मत तरीके से कार्य व्यवहार करे ,तो उनका जीवन स्वास्थ्य  पूर्ण वा ऊर्जामयी होगा ,ऐसी स्त्रियाँ जीवन मे काफ़ी तरक्की करती है ,और रोग मुक्त उल्लास पूर्ण जिंदगी व्यतीत करती है ,
गृहणी का जयदातर समय घर मे रसोई मे या घर के साफ-सफाई के कार्यो मे व्यतीत होता है ,जैसे किचन को ही ले लें ,वास्तु मे बताया गया है की खाना बनाते समय गृहणी का चेहरा किस दिशा मे होना चाहिए ,किचन का सिन्क वा चूल्हा कहाँ होना चाहिए ,किचन का दरवाजा किस दिशा मे होना चाहिए ,किचन के भारी सामानो को किस दिशा मे रखना चाहिए ,किचन मे कौन-कौन सी वस्तुओ को रखना चाहिए आदि ढेर सारी बाते स्त्रियों के स्वास्थ्य वा रिश्तों से जुड़ी है ,अगर स्त्रियाँ वास्तु सम्मत तरीके से कार्य करे , तो उनका जीवन काफ़ी सुख पूर्ण वायतीत होगा ,आइए,वास्तु सम्मत वा वास्तु विरुद्ध कार्य व्यवहार करने वाली स्त्रियों पर वास्तु के प्रभाव ,दुष्प्रभाव व स्वास्थ्य पर एक नज़र डालते है,
1 –आजकल हर उम्र की स्त्रियों का स्वस्थ 4-5 दसक पहले की स्त्रियों की तुलना मे ज़यादा खराब रहने लगा है ,रहन सहन, ख़ान पान ,व्यवहार आदि हर प्रकार की सावधानिया बरतने के बाद भी महिलाओ मे रोग बढ़ते ही जा रहे है ,कारण क्या है/अगर ........................................................................

for more detail please click this link http://trinetraastro.com/

for more detail please click this link http://jyotishsabkeliye.in/

Saturday, 9 August 2014

Rakshabandan ka muhurta 2014


रक्षाबन्धन एक हिन्दू त्यौहार है जो प्रतिवर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। रक्षाबन्धन

 में राखी या रक्षासूत्र का सबसे अधिक महत्व है। राखी कच्चे सूत जैसे सस्ती वस्तु से लेकर रंगीन कलावे, रेशमी 

 धागे, तथा सोने या चाँदी जैसी मँहगी वस्तु तक की हो सकती है। राखी सामान्यतः बहनें भाई को ही बाँधती हैं 

परन्तु ब्राह्मणों, गुरुओं और परिवार में छोटी लड़कियों द्वारा सम्मानित सम्बन्धियों (जैसे पुत्री द्वारा पिता को) भी 

बाँधी जाती है।

रक्षाबन्धन का मुहूर्त 2014



श्रावण पूर्णिमा रविवार को दोपहर १: २० तक भद्रा है. इसके बाद पूरे दिन 

रक्षा बांधने का मुहूर्त है.

for more detail of astrology please click this link......................

Wednesday, 11 June 2014

dhan lakshmi shankh dakshinavarti shankh


                                                 धन लक्ष्मी शंख दक्षिणावर्ती  शंख


                      यह शंख समुद्र मे पैदा होता है. जहाँ से लक्ष्मी का प्रादुर्भाव हुआ. यह शंख भगवती लक्ष्मी का लघु भ्राता कहलाता है.यह शंख लक्ष्मी का ही दूसरा स्वरूप है और प्रत्येक गृहस्थ को अपने घर मे इस शंख को रखना चाहिए . संसार मे जितने शंख पाए जाते हैं वे बाईं तरफ से खुलने वेल होते हैं , परंतु जो शंख दाहिनी ऑर खुलते हैं उस शंख को दक्षिणावर्ती शंख कहा जाता हा.
                       छोटा दक्षिणावर्ती शंख प्रयोग मे नही लाना चाहिए ,क्यूंकी  वह उतना अधिक फलदायक और अचूक नही होता है. कम से कम जिस शंख मे आधा ...............

for more detail please click this   http://trinetraastro.com/

for more detail please click this http://jyotishsabkeliye.in/tantra

sapne

  सपने सच होते हैं---- स्वप्न ज्योतिष के अनुसार नींद में दिखाई देने वाले हर सपने का एक ख़ास संकेत होता है, एक ख़ास फल होता है। यहाँ हम आपको 25...